छतनुमा बाजार का विचार शाहजहां को वर्ष 1646 में पेशावर शहर (अब पाकिस्तान में) देखने के बाद आया था।
लाल किला के लाहौरी दरवाजे के अंदर पहुंचते ही यह ढका हुआ रास्ता मिलता है, जिसके दोनों तरफ दो मंजिला मेहराबदार कक्षों की श्रृंखला है। यहां 64 कक्ष हैं, जिसमें दोनों ओर 32-32 कक्ष हैं।लालकिला के छत्ता बाजार मे निकला मुगलकालीन चित्रकारी।
